आर्य (लेखक - श्री...
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मनुस्मृति में कहा गया है -
आसमुद्रात्तु वै पुर्वादासमुद्रात्तु पश्चिमात्।
तयोरेवान्तरम् गिर्योरार्यावर्तं विदुर्बुधाः ॥ २/२२
अर्थात् - पुर्वीय समुद्र से लेकर पश्चिम समुद्र तक दोनों पर्वतों ( हिमालय और विन्ध्य ) के बीचवाले देशों को विद्वान लोग आर्यावर्त कहते है ।
उन दिनों विन्ध्य पर्वत के दक्षिण का भाग समुद्र में डूबा था या जन शुन्य था इसलिए आर्यावर्त की सीमा पूर्व में समुद्र तक , दक्षिण में विन्ध्य पर्वत तक , पश्चिम में समुद्र तक और उत्तर में हिमालय पर्वत तक बतलाई गई है ।आर्यावर्त अर्थात् आर्य जाति के रहने वाले देश - प्रदेश ।अतः मनुस्मृति से यही प्रमाणित होता है कि हमारी जाति का सब से पुराना नाम आर्य ही है।
एक और प्रमाण -
हमारी संस्कृति की यह परंपरा रही है की हम किसी कार्य को करने के पहले उसका संकल्प लें ।अतः कोई भी पूजा पाठ आरम्भ करते समय सबसे पहले पुरोहित हम से संकल्प बुलवाते हैं ।
उस संकल्प में आता है -

